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रक्षाबंधन शायरी

  ज़िंदगी भर की हिफ़ाज़त की क़सम खाते हुए भाई के हाथ पे इक बहन ने राखी बांधी - अज्ञात किसी के ज़ख़्म पर चाहत से पट्टी कौन बांधेगा अगर बहनें नहीं होंगी तो राखी कौन बांधेगा - मुनव्वर राना बहनों की मोहब्बत की है अज़्मत की अलामत राखी का है त्यौहार मोहब्बत की अलामत - मुस्तफ़ा अकबर या रब मिरी दुआओं में इतना असर रहे फूलों भरा सदा मिरी बहना का घर रहे - अज्ञात रक्षा-बंधन की सुब्ह रस की पुतली  छाई है घटा गगन पे हल्की हल्की  -फ़िराक़ गोरखपुरी बिजली की तरह लचक रहे हैं लच्छे  भाई के है बांधी चमकती राखी  -फ़िराक़ गोरखपुरी चली आती है अब तो हर कहीं बाज़ार की राखी  सुनहरी सब्ज़ रेशम ज़र्द और गुलनार की राखी  - नज़ीर अकबराबादी राखियां ले के सिलोनों की बरहमन निकलें तार बारिश का तो टूटे कोई साअत कोई पल - अज्ञात