15 अगस्त की सुरुआत होती है
1857 की क्रांति से
प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की शुरुआत तब से हुई जब मंगल पांडे नामक क्रांतिकारी को ब्रिटिश शासन के अंग्रेज अधिकारी ने गोली मारी थी। तभी से सम्पूर्ण भारत देशवासियों ने अंग्रेजों के खिलाफ आवाज उठाई। हमे और हमारे देश को ब्रिटिशों से यह आजादी इतनी आसानी से नहीं मिली है। देश की आजादी पाने के लिए बहुत से क्रांतिकारी सेनानियों ने बलिदान दिया जैसे कि- महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस, मंगल पांडे, बाल गंगाधर तिलक, पंडित जवाहरलाल नेहरू, लोक मान्य तिलक, लाला लाजपत राय और खुदीराम बोस आदि। आजादी की लड़ाई लड़ने के लिए महात्मा गांधी ने सत्याग्रह आंदोलन चलाया और कई बार तो उन्हें जेल भी जाना पड़ा। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। क्योकि उनका एकमात्र लक्ष्य भारत देश को ब्रिटिश शासन से आजादी दिलाना था और काफी अत्याचार सहने और संघर्ष करने के पश्चात फलस्वरूप वे सफल भी हुए। स्वतंत्रता सेनानिओं के लिए कुछ लाइनें कहना चाहुँगी/चाहुँगा –
नमन है उन
को जिन्होंने इस देश को बचाया,
गुलामी की मजबूत बेड़ियों को,
अपने बलिदान के रक्त से पिघलाया,।
और भारत माँ को आजाद है कराया15 अगस्त इन फैक्ट्स को जरूर जानें
- 15 अगस्त, 1947 को भारत के पहले प्रधान मंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने दिल्ली में लाल किले के
- लाहौरी गेट के ऊपर भारतीय राष्ट्रीय ध्वज फहराया।
- भारत का राष्ट्रीय गान 'जन गण मन' मूल रूप से रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा बंगाली में भरोतो भाग्यो बिधाता के रूप में लिखा गया था।
- हमारे देश का नाम 'इंडिया' सिंधु नदी के नाम पर पड़ा।
- हमारे राष्ट्रीय ध्वज में तीन रंगों की तीन पट्टियां हैं। भगवा साहस और बलिदान का प्रतीक है। सफेद रंग ईमानदारी, शांति और पवित्रता का प्रतिनिधित्व करता है। वहीं हरा रंग आस्था और शौर्य का प्रतिनिधित्व करता है
- हम स्वतंत्रता दिवस को भारत के राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाते हैं। यह दिवस 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश साम्राज्य से राष्ट्रीय स्वतंत्रता की वर्षगांठ का प्रतीक है। इसके अलावा, यह भारत के लोगों के लिए सबसे शुभ दिन है क्योंकि भारत बहादुर भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों की बहुत सारी कठिनाइयों और बलिदानों के बाद स्वतंत्र हुआ है। उस दिन से 15 अगस्त भारतीय इतिहास में और प्रत्येक भारतीय के दिलों में एक बहुत ही महत्वपूर्ण दिन बन गया है। साथ ही पूरा देश इस दिन को देशभक्ति की पूरी भावना के साथ मनाता है।
भरा नहीं जो भावों से बहती जिसमें रसधार नहीं,
वह हृदय नहीं, वह पत्थर है जिसमे स्वदेश का प्यार नहीं।15 August इस अवसर पर, हमारे विचार सबसे पहले महात्मा गांधी की ओर मुड़ते हैं, जो हमारे स्वतंत्रता संग्राम के पीछे के व्यक्ति और हमारे देश की स्वतंत्रता के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले शहीदों की ओर हैं। हमें हमारे महान देशभक्तों के अथक संघर्ष की भी याद आती है जिन्होंने हमारी मातृभूमि को औपनिवेशिक शासन से मुक्त कराया।
गांधीजी विदेशी शासन और स्वदेशी सामाजिक जंजीरों दोनों से मुक्ति की मांग कर रहे थे, जिन्होंने हमारे समाज को लंबे समय से कैद कर रखा था। हर दूसरे भारतीय को आत्मविश्वास और बेहतर भविष्य की आशा के पथ पर निर्देशित किया गया था। लोकतंत्र हमें एक देश के गौरवान्वित नागरिकों के रूप में स्वतंत्र रूप से जीने का अधिकार देता है। आज हम अपने स्वतंत्रता सेनानियों की दूरदृष्टि और बलिदान के कारण एक में रहने का सौभाग्य प्राप्त कर रहे हैं।आज हम सभी एक स्वतंत्र भारत में जन्म लेने के अपने विशेषाधिकार को स्वीकार करने और अपने देश का 76वां स्वतंत्रता दिवस मनाने के लिए यहां हैं। हमें 1947 से पहले पैदा हुए लोगों से यह जानने की ज़रूरत नहीं है कि उन्होंने औपनिवेशिक शासन के तहत गुलाम होने की पीड़ा किस प्रकार सही। उन दिनों प्रत्येक भारतीय के लिए, उन शक्तिशाली दिग्गजों के लिए अंग्रेजों के खिलाफ लड़ना वास्तव में एक कठिन कार्य था।
उन कठिन समय और संघर्षों को हमारी यादों से मिटने नहीं देना चाहिए। इसलिए, प्रत्येक स्वतंत्रता दिवस पर, हम न केवल अपनी स्वतंत्रता का जश्न मनाते हैं, बल्कि उन लोगों को भी श्रद्धांजलि देते हैं जिन्होंने इसके लिए लड़ाई लड़ी, जिन्होंने हमारे देश के लिए एक दृष्टि रखी, और जिन्होंने इसके लिए खुद को बलिदान कर दिया। हम सदैव उनके इस महान बलिदान को याद रखेंगे
जय हिन्द जय भारत
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