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रक्षाबंधन त्यौहार क्यों मनाया जाता है ।

रक्षाबंधन त्यौहार क्यों मनाया जाता है

Raksha Bandhan 2024 History & Significance: 

रक्षाबंधन का त्‍योहार इस वर्ष 19 अगस्‍त को मनाया जायेगा रहा है. वैसे तो रक्षाबंधन के त्‍योहार से जुड़ीं कई कहानियां प्रचलित हैं, मगर हम आपको बताने जा रहे हैं सबसे मुख्य रोचक ऐतिहासिक और पौराणिक कहानियां जिनसे इस त्‍योहार की शुरुआत भी माना जाता है.

Raksha Bandhan 2023 History 


भाई-बहन के प्रेम का पावन पर्व रक्षाबंधन 19 अगस्‍त को मनाया जाना है. इस वर्ष रक्षाबंधन की तिथि को लेकर भी काफी कंफ्यूशन था मगर ज्‍योतिषियों ने स्‍पष्‍ट किया है कि रक्षाबंधन 19 अगस्‍त को ही मनाया जाएगा. वैसे तो रक्षाबंधन के त्‍योहार से जुड़ीं कई कहानियां प्रचलित हैं, मगर हम आपको बताने जा रहे हैं सबसे रोचक ऐतिहासिक और पौराणिक कहानियां जिनसे इस  त्‍योहार की शुरुआत माना जाता है.

कृष्‍ण और द्रौपदी का रक्षाबंधन


 महाभारत का उदाहरण है

कि जब भगवान कृष्ण ने शिशुपाल का वध किया उनके  बाद जब सुदर्शन चक्र कृष्‍ण की अंगुली पर बैठने के लिए वापस लौटा तो उससे कृष्‍ण की कलाई पर भी हल्‍की चोट लग गई जिससे खून बहने लगा. यह देश द्रौपदी ने फौरन अपनी साड़ी का पल्‍लू फाड़कर कृष्‍ण की कलाई पर बांध दिया. कृष्‍ण ने उन्‍हें धन्‍यवाद किया और वचन दिया कि वे सदैव उनकी रक्षा करेंगे. कौरवों के हाथों जुए में हारे जाने के बाद जब द्रौपदी ने अपनी लाज बचाने के लिए श्रीकृष्‍ण से गुहार लगाई तो उन्‍होंने अपनी बहन के सम्‍मान की रक्षा कर अपना कर्तव्य निभाया।



रानी कर्णावती और हुमायूं की कहानी


मुगल सम्राट हुमायूं का उदाहरण 

देश में एक समय राजपूत मुस्लिम आक्रमण के खिलाफ लड़ रहे थे. अपने पति राणा सांगा की मृत्यु के बाद मेवाड़ की कमान रानी कर्णावती के हाथों में थीं. उस समय गुजरात के बहादुर शाह ने मेवाड़ पर दूसरी बार आक्रमण किया था. कर्णावती ने तब हुमायूं से मदद मांगने लिए उसे राखी भेजी. हुमायूं उस समय एक युद्ध के बीच में था, मगर रानी के इस कदम ने उसे हुमायूं के भीतर से छू लिया. फिर हुमायूं ने अपनी फौज फौरन मेवाड़ के लिए भेज दी. दुर्भाग्‍यवश, उसके सैनिक समय पर नहीं पहुंच सके  और चित्‍तौड़ में राजपूत सेना की हार हो चुकी दी. रानी ने अपने आत्म- सम्मान की रक्षा के लिए जौहर (खुद को आग लगा ली) कर लिया. लेकिन फिर भी  हुमायूं की सेना ने चित्‍तौड़ से शाह को खदेड़ कर रानी के पुत्र विक्रमजीत को गद्दी सौंप दी और अपनी राखी का मान रखा.


इस प्रकार से रक्षाबंधन की सुरुआत होती है जो आज भी भाई-बहन के प्रेम का पावन पर्व रक्षाबंधन

मनाया जाता है 

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